सोमवार, १२ ऑक्टोबर, २०२०
आयुष्य
सोमवार, २४ ऑगस्ट, २०२०
जिंदगी
क्या पता आप जैसी जिंदगी दुसरे लोगो का सपना हो .......
बहुत मजबूत जो जाते है,
वो लोग जो अंदर से टूट जाते है....
जिंदगी को इतनी सस्ती मत बना ओ कि
दो कोडी के लोग खेळ कर चले जाये.....
मै जानता हू किं मै कुछ तो हू
क्योकि
वो कोई भी चीज बेकार नही बनाता
पारखता रहा उम्र भर ताकत दवाओ कि,
दंग रह गया देखकर ताकत दुआ ओ कि.
प्रभू कहते है तू सोने से पहले सबको माफ कर मै उठणे से पहले तुझे माफ
कर दुंगा ......
शुक्रवार, १९ जून, २०२०
एक सच्चाई भी
वादा निभाया भी ना जाए तो किया भी ना करा करो
इस खेल में तो बस आप का वादा टूटा है
लेकिन किसी का दिल अंदर तक टूट जाता है
दिल और भरोसा टूटने की आवाज नहीं आती पर
दर्द बहुत ही ज्यादा होता है
पत्तों सी हो गई आजकल रिश्तो की जिंदगी
आज हरे है कल सूख जाएंगे
और परसों टूट जाएंगे
वक्त ने दिखा दी सब की असलियत
वरना हम तो वह थे
जो सबको अपना कहते थे
हमेशा तैयारी के साथ ही रहना चाहिए मौसम और इंसान कब बदल जाए इसका कोई भरोसा नहीं है
लोग हमारी कदर तब नहीं करते जब हम अकेले हो
बल्कि तब करते हैं जबकि वह अकेले हो
अच्छा इंसान मतलबी नहीं होता
बल्कि बहुत दर हो जाता है उन लोगों से
जिन्हें उनकी कदर नहीं होती
गुरुवार, १८ जून, २०२०
भरोसा
बुधवार, २७ मे, २०२०
चिंता एक रोग.............
गुरुवार, १४ मे, २०२०
समय समय की कसौटी......
अपनों का साथ बड़ा अवश्य होता है,
सुख हो तो बढ़ जाता है,
दुखों हो तो बट जाता है,
अपनों के साथ समय कब बीत जाता है,
पता भी नहीं चलता,
किंतु सोचिए।
यदि आपको ऐसे स्थान पर छोड़ दिया जाए
जहां आपका कोई संबंध ही ना हो,
आपका कोई अपना नाम,
कोई मित्र ना हो,
तो क्या होगा,
एक एक क्षण कितना,
लंबा लगने लगेगा,
तब तक लगेगा जब तक आप किसी को अपना नहीं बनाते,
अब प्रश्न यह उठता है कि आपका अपना कौन है,
ओ संबंधी जो आप रक्त के साथ जुड़े हुए हैं,
जो ओ मित्र जो आप बालपन के साथ पढ़े हुए हैं,
नहीं.......
अपना वो,
जो कठिनाइयां में काम आए,
अपनों की परख समय की कसौटी पर की जाती है,
अपनों के साथ समय का पता नहीं चलता,
किंतु समय के साथ अपनों का पता जरूर चलता है।
बुधवार, १३ मे, २०२०
समझ,,,,,,,
समझ लेना अच्छे कर्मों का फल मिल रहा है।
और जब रुलाए,
समझ लेना कि अच्छे कर्म करने का समय आ गया है।
सब कुछ खो कर भी,
अगर आपने कुछ करने की हिम्मत बाकी है।
तो समझ लीजिए,
आपने कुछ भी नहीं खोया।
घायल तो यहां हर एक परिंदा है।
मगर जो फिर से उड़ सके।
भी जिंदा है।
वक्त सब कुछ दिखा देता है।
लोगों का साथ भी।
लोगों की औकात भी।
कठिन रास्तों से ना घबराए।
क्योंकि कठिन रास्ते।
अक्सर खूबसूरत मंजिलों पर ले जाते हैं।
विश्वास करने वाले से ज्यादा बेवकूफ विश्वास तोड़ने वाला होता है।
क्योंकि वह अपने छोटे से स्वार्थ के लिए।
एक प्यारे इंसान को खो देता है।
अगर मरने के बाद भी जीना चाहते हो
तो एक काम जरूर करना
पढ़ने लायक कुछ लिख जाना
या लिखने लायक कुछ कर जाना।
उस शिक्षा का कोई मतलब नहीं है
जो इंसानियत नहीं सिखाती
गलत को गलत और सही को सही कहने कि हिम्मत रखना।
बुधवार, ६ मे, २०२०
एक प्यार भी,,,,,,,,
जिन के कानों तक आपकी आवाज ही नहीं पहुंचती
वा दे तो हजार की थी तूने
चल बता
दे उन में से कोई एक
जो तूने निभाया हो
जो कहते थे कि जी ना सकेंगे तेरे बिना
हो आज भी जिंदा है किसी और को यह सब कहने के लिए
जो कहता था कि हम सिर्फ तेरे हैं
आज पता चला
कि उनकी यह लाइन के पीछे
बहुत से चेहरे है
कसम खाते हैं जो लोग सात जन्म के लिए साथ निभाने की
वक्त आने पर सात कदम उनसे चला नहीं जाता
एक वक्त था घंटों तक तेरे कॉल और एसएमएस का इंतजार किया करते थे
पल पल तेरे प्यार के लिए मरा करते थे
पर इस कदर दिल तोड़ दिया है तूने
ना तेरा प्यार चाहिए ना तेरा वक्त
और ना तू चाहिए
सजा के रखना अपने घमंड को अपने सर पर
तुझसे बात करना तो दूर तेरी शक्ल भी नहीं देखेंगे
रोएगा वह शख्स एक दिन
जिस दिन हमें किसी और के साथ हंसता हुआ पाएगा।
बंद कर दी है तेरे लिए दिल के दरवाजे अब
यह मेरा दिल है कोई खिलौना नहीं
जो हर बार खेल जाओगे
वह कहते थे कि तू तो मेरा भगवान है
यह तो समझ तब आया जब लोगों को भगवान से प्यार करते ही नहीं
हमेशा मांगते हुए देखा
सोच अलग हो सकती है हमारी
मगर प्यार में खुद को लुटा देने की ताकत
तेरे जैसे मतलबी इंसान की बस की बात नहीं
माना प्यार दोनों ने किया था
तूने जो किया था उससे मन की चाहत कहते हैं
और हमने जो किया था उसी रूह की इबादत कहते हैं
जो कहते थे कि मर जाएंगे तेरे बिना
पता चला बहुत नाचते हैं आजकल गैरों की महफिल में
तू चाहता तो हम एक हो सकते थे
अब बात इतनी सी है
कि तूने कभी चाहा ही नहीं
वह कहते हैं कि तुम हमें समझती ही नहीं
वह सही कहते हैं
अगर उन्हें समझाते
तो कभी मुझसे मोहब्बत नहीं करते
जब कोई इंसान वही गलती बार-बार करें
जो तुम्हें दर्द देती है
तो समझ जाओ
वह तुम्हारा साथ नहीं चाहता
वह तुम से छुटकारा चाहता है
सोचते थे कि कैसे जी पाएंगे तेरे बिना
शुक्रगुजार हूं तेरा
तुनहे ही सिखा दिया वक्त ना देकर
तेरे बिना जीना
उसके लिए दुनिया की हर खुशी खरीदने में हम इतने खो गए
कि कभी ख्याल ही नहीं आया
कि उन्होंने कभी आज तक हमारे लिए कागज का फूल भी नहीं खरीदा हमारे लिए
अपनी हर गलती को
हो मजबूरी का नाम देते हुए हमें
हम धोखा देते गए
और हम ना समझ
उनकी हर बात को सच समझ बैठे
वक्त कैसे मिलता हमारे लिए
क्योंकि उन्हें बहुत कुछ पाना है जमाने से
अब कोई
हमारे तरहे प्यार में खुद को तो नहीं लुटा सकता ना
मंगळवार, ५ मे, २०२०
जिंदगी............
अगर तुम जीते
तुम्हें सब कुछ मिलेगा जो तुम चाहते हो
और अगर तुम हार भी गए
और बहुत कुछ सीख जाओगे
जिंदगी में कभी उदास मत होना
कभी भी किसी भी बात पर निराश मत होना
यह जिंदगी तो एक संघर्ष है
इसीलिए कभी अपने जीने का अंदाज ना खोना
उन लोगों के सामने हमेशा खुश रहो
जो तुम्हें पसंद नहीं करते
क्योंकि तुम्हारी खुशी उन्हें जीते जी मार देगी
परेशान मत हुआ करो लोगों की बातों से
कुछ लोग पैदा ही बकवास करने के लिए होते हैं
उस इंसान की शक्ति का कोई मुकाबला नहीं कर सकता
जिसके पास शक्ति के साथ सहनशक्ति भी हो
छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता
और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।
याद रखना
सपने अगर तुहमरे है
तो पूरा भी तुम्हीं करोगे
ना हालत तुहमारे हिसाब से होंगे
और ना लोग।
शनिवार, २ मे, २०२०
एक तमन्ना
उदासी तुम पर भी बितेगी, तो तुम भी जान जाओगे.
शुक्रवार, १ मे, २०२०
जगावं कसं......
हरलात तरी चालेल फक्त जिंकणारा स्वतःहून म्हंटला पाहिजे हा खेळ आयुष्यातील सर्वात कठीण होता.
वेळ कसा निघून जाते तो तुमच्या आयुष्यात घडवण्यात घाला किंवा इकडे तिकडे फिरण्यात.
शेवटी विचार तुम्हालाच करणार आयुष्य तुमचा आहे.
अध्याय म्हणून सुरुवात करा आणि अविस्मरणीय म्हणून शेवट करा.
नेतृत्व असं करा की सत्ता तुमची नसली तरी लोकांनी राजा तुम्हाला
म्हटला पाहिजे.
कसं जगायचं हे बापाने मुलाला सांगण्यापेक्षा कसं जगावे बापाने मुलाला जगून दाखवा आणि मुलांना ते बापाकडुन शिकवा.
बाकीचे लोक तुम्हाला कसे बघतात हे महत्वाचं नाही. तुम्ही स्वतःला कसे बघतात हे महत्त्वाचा आहे.
आयुष्यात धाडस केल्याशिवाय काहीच मिळत नाही अपयशाशिवाय.
प्रत्येक वेळी डरकाळी सोहळ्याची आवश्यकता नसते शांतता तरीदेखील मोठी दहशत होऊ शकते.
सिंह ज्या जागेवर बसतो त्या जागेवर त्याचे सिंहासन तयार होते. म्हणून सिंहासन मिळवण्याच्या मागे लागू नका. स्वतःला सिह बना. तुम्ही बसा त्या जागेवर आपोआप सिंहासन बनेल.
लोकोत्तर नाव ठेवतच जाणार पण ठेवलेल्या नावाचा ब्रँड बनवता आला पाहिजे.
तुम्ही लहान आहे तरुण आहे तुम्हाला यश मिळणार नाही असं समजू नका. वाघ लहान असो की मोठा तो वाघाचा असतो.
कर्तव्याची एकनिष्ठ असणारी माणसे आयुष्यात कधीच अपयशी होत नाही.
एक महाविजेता होण्यासाठी आपल्याला आपला सर्वोत्तम आहे हा विचार विश्वास आवश्यक आहे.
सामर्थ्य जगण्यातून मिळत नसते ते
ते संघर्षातून निर्माण करावे लागते.
इज्जत आणि तारी फ मागितली नाही जात. ती मिळवली जाते.
जिथे समस्या असतात तिथे संधी सुद्धा असतात. तुम्ही केलेली चूक ही सर्वस्वी तुमची चुक आहे. तुम्ही केलेला पराजय हे सर्वस्वी तुमच्या पराजय आहे.
म्हणून कोणाला दोष देऊ नका. झालेल्या चुकिपासुन शिका आणि पुढे चालत राहा.
विचार ब्रॅण्डेड असले पाहिजे कपडे नाही.
शब्द दिल्याने आशा निर्माण होतात आणि दिलेला शब्द पाडल्याने विश्वास विश्वास निर्माण होतात...........
शनिवार, २५ एप्रिल, २०२०
छो ड दो,,,,,,,
एक किळ
गुरुवार, २३ एप्रिल, २०२०
पैशाची उधारी*
एकजन भेटला राजा,
लैच होता तावात,
पैशासाठी हिंडला थो,
हफ्ताभर गावात..
पुऱ्या गावात त्याले कोनी,
मदत नाही केलती
माही बी राजा त्यानं,
उधारी नाही देलती..
कोन्या तोंडानं मांगीन मले,
माहे जुनेच होते बाकी,
लोकाइबद्दल सांगत होता,
मले टपरी पाशी..
मानूस ओयखाले म्हने राजा,
कितीक टाईम लागते?🤔
पैशे पाय मांगून,
सहज पता लागते...
म्या म्हटलं आपलेबी,
वापस देल्ले पाह्यजे😉
टायमावर कुनी राजा,
उधारी नाई चुकवत, 😉
सगे सोयरे दोस्त मित्र,
साऱ्याइले बसते दुखवत😔
घेतले तसे पटकन,
देवुन टाकावं मानसानं,
डबल मांग्यासाठी,
जागा ठेवावं हक्कांन..
देऊन घेऊन ज्यायचे,
व्यवहार असतीन चांगले,
तेच मानसं भाऊ,
माह्या मतान चांगले..😎
रविवार, ५ एप्रिल, २०२०
कोरोनावर एक विचार
तुमालेबी होते,
करोना हाय असा,
तो कोनालेबी होते,
ना पाह्यते जात,
ना पाह्यते अमिरी-गरिबी,
देश विदेशात फैलली,
हे खतरनाक बिमारी...
कायजीच घेणं हाय,
फक्त आपल्या हातात,
बाहेर जाऊन कामुन,
जीव टाकता धोक्यात..
एकाची बी चूक,
अंगलटी येऊ शकते,
लागण ह्या रोगाची,
दारोदारी पोहचू शकते..
मस्ती नका आणू,
माज नका करू,
माणुसकीची सांगतो,
लाज नका काढू..
आपल्यापेक्षा नाहीतर,
जनावरं तरी बरी,
मालकाच्या मतानं,
ऐकतात तर खरी..
आपल्या सूंदर देशाचा,
मसनवटा नका करू,
धोका ओळखा पुढचा,
बेमौत नका मरू.
सवय
थुकू नका म्हटलं,
तिथं पयले थुकतीन,
नाही म्हटलं तिथं,
आंदी जाऊन मुततीन..
फोटोसोबत पाकिटावर,
इशारे देल्ले छापून,
सांगा बरं तंबाखू, बिडी,
कोनाची गेली सुटून ?
नाई म्हटलं थे त,
हिरीरीनं करतीन,
घरात बसा म्हटलं,
त रस्त्यावर फिरतीन,
वखत सध्या कसा?
सरकार काय सांगते?
काही लोकं राजा,
नीरा म्याटावानीच वागते..
संचार बंदीत दारूचे,
दुकान फुटू राह्यले,
अशात बी लोकाइले,
भलकाईच सुचू राह्यले..
नाईलाजान पोलीसं मंग
जयलात टाकू रायले,
समजून मारून थे बी,
पुरे कटावू रायले..
काही ठिकानी डॉक्टरले थ,
गोटे मारू राह्यले,
असे म्याट त राजा,
म्या जिंदगीत नाई पाह्यले..
बार्डर वर नाई,
फकस्त घरात राहायले सांगतल,
भडकून अशे राह्यले का,
जसं जीव द्याले सांगतल..
देशासाठी भौ आपन,
येवळ बी न करावं?
देशाचं उपकार मंग,
सांग कधी फेळाव ........
गुरुवार, २ एप्रिल, २०२०
देश को अपने बचाना है*
*देश को अपने बचाना है*
हम सबकी यह जिम्मेदारी है,
भयानक यह बीमारी है,
करोना को भगाना है,
देश को अपने बचाना है..
घरके ही भीतर बैठेंगे,
बार बार हाथ साफ धोयेंगे,
मुँहपर मास्क चढ़ाएंगे,
आपस में दूरियाँ बनायेंगे,
करोना को हराना है,
देश को अपने बचाना है...
सरकारकी बाते सुननी है,
होटल-दुकाने बंद रखनी है,
चाहे हो नुकसान फिरभी,
समझदारी तो जतानी है,
करोना को हटाना है,
देश को अपने बचाना है...
एकताका परचम लेकर,
साथ हमको लड़ना है,
कुछ दिन रुकलो दोस्त,
फिर तो आगे बढ़ना है,
करोना पीछे छोड़ना है,
देश को अपने बचाना है..
बुधवार, १ एप्रिल, २०२०
अनुभव
माणसाची ही नेहमीच प्रवृत्ती राहिली की, जोवर स्वतःवर बेतत नाही तोवर त्याचे महत्व कळत नाही, या आशयावर लिहलेली कविता..
आम्ही स्वार्थी लोकं,
मुळीच सुधरणार नाही,
कुणी कितीही सांगो,
काळजी घेणार नाही..
स्वतः पडल्याशिवाय,
अनुभव घेत नाही,
जात आमुची अशी,
बापाचंही ऐकत नाही..
विनंती करतंय सरकार,
घरात आपल्या रहा,
काही दिवस तरी,
सामाजिक अंतर ठेवा..
कितीतरी अपघात,
रोज रस्त्यावर होतात,
पण चालवणारे त्याच,
किती मनावर घेतात ?
मरणालाही माणूस,
तोवर भीत नाही,
जोवर त्याच्यासोबत,
प्रसंग घडत नाही..
घरात आजार आल्याशिवाय,
कोणी सुधरणार नाही,
करोनाला गमतीत घेणं,
तोवर सोडणार नाही..
म्हणून म्हणतो देवा,
प्रत्येक घरात किमान,
सर्दी खोकला होऊ दे,
प्रत्येकाच्या मनात,
भीतीचं घर होऊ दे..
सोमवार, ३० मार्च, २०२०
कविता
माणसाची ही नेहमीच प्रवृत्ती राहिली की, जोवर स्वतःवर बेतत नाही तोवर त्याचे महत्व कळत नाही, या आशयावर लिहलेली कविता..
आम्ही स्वार्थी लोकं,
मुळीच सुधरणार नाही,
कुणी कितीही सांगो,
काळजी घेणार नाही..
स्वतः पडल्याशिवाय,
अनुभव घेत नाही,
जात आमुची अशी,
बापाचंही ऐकत नाही..
विनंती करतंय सरकार,
घरात आपल्या रहा,
काही दिवस तरी,
सामाजिक अंतर ठेवा..
कितीतरी अपघात,
रोज रस्त्यावर होतात,
पण चालवणारे त्याच,
किती मनावर घेतात ?
मरणालाही माणूस,
तोवर भीत नाही,
जोवर त्याच्यासोबत,
प्रसंग घडत नाही..
घरात आजार आल्याशिवाय,
कोणी सुधरणार नाही,
करोनाला गमतीत घेणं,
तोवर सोडणार नाही..
म्हणून म्हणतो देवा,
प्रत्येक घरात किमान,
सर्दी खोकला होऊ दे,
प्रत्येकाच्या मनात,
भीतीचं घर होऊ दे..
रविवार, २९ मार्च, २०२०
समाज
काल मला एक नाटक बघण्याचा योग आला. त्या नाटकातील एक संवाद असा होता,
*समाजाला स्वतःच डोकं नसते, त्याला असतात त्या फक्त भावना........*
मी थोडा खोलवर विचार केला, खरंच असं असते का? तर उत्तर "होय" मिळालं.
समाजाला खरंच स्वतःच डोकं नसतं, असतात तर त्या फक्त भावना..
ज्या वाटेल त्याने भडकाव्यात किंवा त्या भावनेला हात घालून वाटेल तसा उपयोग करून घ्यावा.
समाज म्हटलं की त्यात कुठलीही एक व्यक्ती येत नाही तर येतो तो व्यक्तींचा समूह.
समूह म्हटल्यापेक्षा कळप म्हणने कधीही योग्य राहील; ज्यामध्ये समोरच्याने जिकडे म्हटले तिकडे कुठलाही विचार न करता जाणे.
आजकाल असंच चित्र बघायला मिळतं कुणी भावनांना दुखावतं तर कुणी त्या भावनांना स्पर्श करतयं आणि त्याला प्रतिसाद म्हणून समाज रस्त्यावर उतरतो.
कुण्या एका व्यक्तीला जर रस्त्यावर उतरायला सांगितले तर तो १० वेळा विचार करणार की, आपण जे करतोय किंवा करणार आहो ते चांगले आहे वाईट.. कारण त्याला स्वतःच डोकं असतं, पण समाजाला म्हटला की समाज वाटेल तसा बोटावर नाचवला जाऊ शकतो फक्त भावनेला हात घालायचा असतो.
आणि हो आपल्याकडे बरेचजणांना भावनेसोबत खेळण्यामध्ये *विशारद* प्राप्त झालेले आहे, त्यामुळे कृपया समाजाचा हिस्सा होतांना सावध असावे, आणि आपली सद्सद्विवेक बुद्धी जागृत ठेवावी.
मी उद्योजक होणार
मी उद्योजक होणार ----------------------------------------- 1 ते 50 लाख पर्यंत प्रोत्साहन योजना महाराष्ट्र शासन उद्योग संचालनालय , जिल्ह्...
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* **जाणीव झाली मला,* *स्वतः बनल्यावर मी आई,* ९ महीने उदरात तुझ्या, वाढले मी आई, किती त्रास तुला, झाला असेल आई, खरंच किती ग्रेट, आ...
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थांबुनी थोडा, तू घे उसासा, मिठीत माझ्या, तू घे विसावा... मिठीत तुझ्या, देह स्थिजावा, श्वासात तुझ्या, श्वास भिनावा.. प्रेमाचा...
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* व्यंग हास्यरस कविता* _आजच्या नाट्यमय घडामोडीवर सुचलेली कविता, कृपया कवितेकडे केवळ व्यंग म्हणून बघावे._ कानोकान नवती, कोनालेबी खबर...














