चिंता एक ऐसी बीमारी है,
जो आपकी मन की सारी खुशियों को खा जाती है,
बहुत ज्यादा चिंता करने वाला इंसान कभी खुश नहीं दिखेगा,
चिंता चिंता में डूबे इंसान को किसी भी बात की खुशी नहीं मिलती,
एक ही बात को लगातार सोचते ही रहेंगे सोचते ही रहेंगे,
ऐसे लोग हमेशा मायूसी और दुख की ऊर्जा में घिरे रहते है,
चाहे कोई खुशी का मौका हो, कोई उत्सव हो या कोई खुशी का त्योहारों,
कोई चीज ऐसे लोगों को खुशी नहीं दे पाती,
ऐसे लोगों को लगता है, सारी जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है, हम ध्यान न रखें,
तो सब कुछ बिगड़ जाएगा, पर यह सच नहीं है,
कई बार सिर्फ आपकी चिंता करने की वजह से बनती हुवे काम भी बिगड़ जाते हैं,
परिवार में अगर एक इंसान चिंता करता है,
तो उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है,
सारे घर में वही एनर्जी पहले लगती है,
ऐसे घर में कोई खुश नहीं रह पाता।
ऐसे लोगों की धीरे-धीरे ऐसी आदत बन जाती है,
कि वह हर छोटी-छोटी बातों से टेंशन में आ जाते हैं, जो इंसान बहुत ज्यादा चिंता करता है, फिर उसे गुस्सा चिड़चिड़ापन अशांति बेचैनी देर रात तक नींद ना आना सारी बीमारियां लग जाती है।
एक सच कहूं आपसे शायद आपको कड़वा लगे या हो सकता है, आप ना भी मानो।
जितनी जायदा आप चिंता करते हो ना वास्तविक वास्तविक में ऐसा कुछ भी नहीं।
जिसकी चिंता की जाए।
कई लोग कहते हैं,
आपको क्या पता मेरी लाइफ के बारे में
लाइफ कैसी भी हो,
पर अगर आप समाधान नहीं निकाल पाते
परेशानियों का इसका मतलब आप खुद एक परेशानी है।
if you can't solve the problem, you are the problem.
चिंता एक ऐसा जहर है वह आपका कल तो खुश नहीं बनाएगी लेकिन आज का दिन आज की खुशियां पूरी बर्बाद कर देगी।
वास्तव में चिंता क्या है
ऐसा ना हो जाए वैसा ना हो जाए ऐसा क्यों हो रहा है। इसका सीधा सा मतलब है,
चिंता आप उसी बातों की करते हो,
जो आपके कंट्रोल में नहीं है,
अब जो आप के कंट्रोल में ही नहीं है,
उनके बारे में सोच सोच कर आप कौन सा स्वर्ग खड़ा कर लोगे।

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