जीवन में समय चाहे जैसा भी हो,
अपनों का साथ बड़ा अवश्य होता है,
सुख हो तो बढ़ जाता है,
दुखों हो तो बट जाता है,
अपनों के साथ समय कब बीत जाता है,
पता भी नहीं चलता,
किंतु सोचिए।
यदि आपको ऐसे स्थान पर छोड़ दिया जाए
जहां आपका कोई संबंध ही ना हो,
आपका कोई अपना नाम,
कोई मित्र ना हो,
तो क्या होगा,
एक एक क्षण कितना,
लंबा लगने लगेगा,
तब तक लगेगा जब तक आप किसी को अपना नहीं बनाते,
अब प्रश्न यह उठता है कि आपका अपना कौन है,
ओ संबंधी जो आप रक्त के साथ जुड़े हुए हैं,
जो ओ मित्र जो आप बालपन के साथ पढ़े हुए हैं,
नहीं.......
अपना वो,
जो कठिनाइयां में काम आए,
अपनों की परख समय की कसौटी पर की जाती है,
अपनों के साथ समय का पता नहीं चलता,
किंतु समय के साथ अपनों का पता जरूर चलता है।
अपनों का साथ बड़ा अवश्य होता है,
सुख हो तो बढ़ जाता है,
दुखों हो तो बट जाता है,
अपनों के साथ समय कब बीत जाता है,
पता भी नहीं चलता,
किंतु सोचिए।
यदि आपको ऐसे स्थान पर छोड़ दिया जाए
जहां आपका कोई संबंध ही ना हो,
आपका कोई अपना नाम,
कोई मित्र ना हो,
तो क्या होगा,
एक एक क्षण कितना,
लंबा लगने लगेगा,
तब तक लगेगा जब तक आप किसी को अपना नहीं बनाते,
अब प्रश्न यह उठता है कि आपका अपना कौन है,
ओ संबंधी जो आप रक्त के साथ जुड़े हुए हैं,
जो ओ मित्र जो आप बालपन के साथ पढ़े हुए हैं,
नहीं.......
अपना वो,
जो कठिनाइयां में काम आए,
अपनों की परख समय की कसौटी पर की जाती है,
अपनों के साथ समय का पता नहीं चलता,
किंतु समय के साथ अपनों का पता जरूर चलता है।
Very Nice Da...👌👌👌
उत्तर द्याहटवाThanks
उत्तर द्याहटवा